स्वप्नदोष: कारण और निवारण

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स्वप्नदोष
स्वप्न मेँ किसी के साथ रति क्रिया करते हुए वीर्यपात का होना स्वप्नदोष कहलाता है।स्वपनदोष को माह मे 1 से 2 बार होना चिँताजनक नहीँ परंतु अधिक होने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है एवं शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी भी स्थिति बन सकती है |
कारण :

जिन्होँने किशोरावस्था में (12-17 वर्ष ) के समय मेँ अपने हाथोँ से वीर्यवाहक नली (Spermatic cord) को आघात पहुचाया हो और अपनी वीर्य नष्ट किया हो, अर्थात हस्तमैथुन किया हो |
अश्लील साहित्य अथवा चिंतन करते हों उन्हें अक्सर यह रोग होता है ।
इसके अतिरिक्त कब्ज का रहना, अधिक मिर्च-मसालों का सेवन, फास्टफूड, जंकफूड एवं अन्य अप्राकृतिक खाद्यों का सेवन करना |

लक्षण :

कमर मेँ दर्द
सिर चकराना
दिल ज्यादा धड़कना
किसी काम मेँ मन न लगना
लिखते-पढ़ते आँखोँ के नीचे अँधेरा आना
स्मृति शक्ति का कमजोर होना

प्रातः खाली पेट एक बताशे मेँ 10 बुँदे बरगद का दुध रख कर 3 महिने तक खायेँ । और ब्रह्मचर्य का पालन करने से स्वप्नदोष ठीक होता है | यह प्रयोग शीघ्रपतन के रोगियों के लिए भी अत्यंत लाभकर है |
प्रतिदिन रात्रि को सोने से पहले 4- 5 चमच्च की मात्रा में तुलसी की जड़ का काढा कुछ हफ़्तों तक पीने से स्वप्नदोष दूर होता है |
एक चमच्च की मात्रा में बड़े गोखरू के फल का चूर्ण , थोडा घी और मिश्री मिलाकर एक हफ्ते तक सुबह शाम लेने से भी स्वप्नदोष दूर होता है
अपामार्ग की जड़ का चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में पीस कर एक साथ मिश्रण कर लें ! इस मिश्रण को एक चमच्च की मात्रा में दिन में तीन बार दो हफ्ते तक सेवन करने से स्वप्नदोष से छुटकारा मिल जाता है |
इसबगोल और मिश्री बराबर मिलाकर एक चमच्च एक कप दूध के साथ रात को सोने से एक घंटे पहले लें और उसके बाद सोते समय मूत्र त्याग करके सो जाएँ ! इससे भी स्वप्नदोष का निराकरण होता है |
आँवले के रस में इलायची के दाने और इसबगोल बराबर की मात्रा में मिलाकर सुबह शाम एक एक चमच्च का सेवन करने से भी स्वप्नदोष दूर होता है |

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