अनुशासन सफलता की कुंजी, आशाओं के तले दबने की बजाए खुद लक्ष्य तय करें छात्र : मोदी

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दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अनुशासन सफलता को मजबूत बनाने की आधार शिला है इसलिए छात्रों को दूसरों से स्पर्धा करने की बजाय खुद से स्पर्धा करनी चाहिए और आशाओं के बोझ के नीचे दबने की बजाए अपना लक्ष्य खुद निर्धारित करना चाहिए।

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ये बात सही है। प्रतिस्पर्धा क्यों? अनुस्पर्धा क्यों नहीं। हम दूसरों से स्पर्धा करने में अपना समय क्यों बर्बाद करें। हम खुद से ही स्पर्धा क्यों न करें। हम अपने ही पहले के सारे रिकॉर्ड क्यों न तोड़ें । आप देखिये, आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं पायेगा और अपने ही पिछले रिकॉर्ड को जब तोड़ोगे, तब आपको खुशी के लिए, संतोष के लिए किसी और से अपेक्षा भी नहीं रहेगी। एक भीतर से संतोष प्रकट होगा। ’’ प्रधानमंत्री ने आज मन की बात में अपने संबोधन में अधिकांश समय में बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ संवाद किया । इस दौरान उन्होंने ‘नरेन्द्र मोदी एप’ पर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, वैज्ञानिक सी एन आर राव, शतरंज के गैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद, आध्यात्मिक गुरू मोरारी बापू के बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के नाम संदेश सुनाये ।

प्रधानमंत्री ने आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं नोबेल पुरस्कार विजेता सी वी रमण को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी । इस अवसर पर मोदी ने विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत की सहभागिता का जिक्र करते हुए अपनी सरकार द्वारा देश में लेजर आधारित लिगो प्रयोगशाला स्थापित करने के फैसले का जिक्र किया। मोदी ने ‘मन की बात’ में बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों तक क्रिकेटर सचिन तेंदूलकर का संदेश पहुंचाया जिसमें सचिन से छात्रों को उम्मीदों के बोझ के तले नहीं दबने, अपना लक्ष्य खुद तय करने और सकारात्मक रहने का सुझाव दिया।

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