आज पेश होगा आम बजट, जेटली के पिटारे पर होगी सबकी नजर

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arun jetli
अरुण जेटली सोमवार को अपना तीसरा बजट पेश करेंगे। माना जा रहा है कि फाइनेंस मिनिस्टर के सामने बजट में एग्रीकल्चर और इंडस्ट्री वर्ल्ड की जरूरतों के बीच बैलेंस बनाना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा वर्ल्ड इकोनॉमी में सुस्ती के बीच, डेवलपमेंट के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने, रिसोर्स जुटाने का भी टारगेट होगा। आम लोगों पर बोझ बढ़ सकता है। सैलरी एम्प्लाई निराश हो सकते हैं।
सूखे की वजह से ग्रामीण भारत की हालत ख़राब हुई है और उसे राहत देने की बड़ी चुनौती भी वित्तमंत्री के सामने रहेगी। ऐसे में ये देखना दिलचस्प रखेगा कि अरुण जेटली अपनी पोटली से क्या-क्या निकालते हैं।

हालांकि इस बारे में शुक्रवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16 में सुझाव देते हुए कहा गया है कि उम्मीदों को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है। बजट में यह भी देखा जाएगा कि सर्वेक्षण के सुझावों को कहां तक अपनाया गया है। सर्वेक्षण में सब्सिडी को सुसंगत करने और ज्यादा लोगों को कर दायरे में लाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने जैसे सुझाव दिए गए हैं।
जेटली कारपोरेट कर की दरों को चार साल में 30 से 25 फीसद करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए भी कुछ कदम उठाएंगे। बजट में इस प्रक्रिया की शुरुआत कर सकते हैं, जिसमें कर छूट को वापस लिया जाना शामिल होगा। सरकार की आमदनी बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री को अप्रत्यक्ष कर बढ़ाने होंगे या नए कर लगाने होंगे। सेवा कर को पिछले साल बढ़ा कर 14.5 फीसद किया गया है। जीएसटी में इसके लिए 18 फीसद की दर को जो प्रस्ताव है उसको देखते हुए सेवा कर में बढ़ोतरी हो सकती है। पिछले साल लगाए गए स्वच्छ भारत उपकर की तरह स्टार्ट अप इंडिया या डिजिटल इंडिया पहल के लिए धन जुटाने को लेकर नया उपकर लगाया जा सकता है। वित्त मंत्री के एजंडे में निवेश चक्र में सुधार भी शामिल होगा।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अध्यक्ष हर्षवर्धन नेवतिया ने कहा, ‘आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में 8-10 फीसदी विकास दर हासिल करने की क्षमता है और इसे हासिल करने के लिए तीन क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है- उद्यमिता को बढ़ावा देना, सरकार की भूमिका कम करना और स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर निवेश बढ़ाना।’

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