मप्र: स्कूलों में खेल पीरियड अनिवार्य, लगेगी योग और ध्यान की भी क्लास

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पढ़ाई के तनाव से परेशान होकर छात्र-छात्राओं की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से खेल का पीरियड अनिवार्य किया जाएगा। विद्यार्थियों को तनाव से उबारने योग और ध्यान को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सबसे ज्यादा तनाव और दबाव का सामना 10वीं और 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को करना पड़ता है। तनाव से बचाने के लिए 9वीं क्लास से ही बच्चों के साथ शिक्षकों और माता-पिता की काउंसलिंग भी शुरू होगी। ये व्यवस्था सरकारी और गैर सरकारी सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू होगी।

विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह सचमुच भयावह है, कच्ची मिट्टी के समान दो-ढाई साल के बच्चों को बस्ते लेकर स्कूल भेज दिया जाता है। वे जिस तनाव और दबाव का सामना बचपन में करने लगते हंै उससे उनका स्वाभाविक बचपन ही खो जाता है। उध्ार स्कूल भी अपनी रेटिंग बढ़ाने के लिए बच्चों पर दबाव बनाते हंै। माता-पिता और स्कूल के दबाव में आकर बच्चे बेहद बुरी स्थिति का सामना करते हैं। इस सोच में ही बदलाव लाना जरूरी है।

गांधी-कलाम और तेंदुलकर

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, महान वैज्ञानिक थामस एडिशन, अल्बर्ट आइंसटाइन, महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने इतिहास बनाया इसलिए अच्छे नंबर लाना कोई सफलता का मापदंड नहीं है। प्रायवेट स्कूल बधाों पर अच्छे नंबर लाने के लिए दबाव बनाते हैं। इसके लिए तत्कालिक उपाय किया जाना बेहद जरूरी है।

जिसे देखो कोटा भाग रहा है

मुख्यंमत्री ने कहा कि मैं किसी शहर का नाम लेना नहीं चाहता, लेकिन आईआईटी के लिए जिसे देखो वह अपने बच्चों को लेकर कोटा (राजस्थान) भाग रहा है। वहां बच्चे किस हालत में और दबाव में रह रहे हैं, इसकी भी तो कोई परवाह करे। बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं, क्या केवल आईआईटी, आईआईएम और पीएमटी में ही कॅरियर होता है?

वोकेशनल कोर्स शुरू होंगे

पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम वोकेशनल ट्रेनिंग कोर्स शुरू करेंगे, ताकि 12वीं के बाद ही बच्चों को रोजगार के लिए कई सारे विकल्प मिल जाएं। हमें यह बात विद्यार्थियों को समझाना होगी कि वे सिर्फ पढ़ाई करें, परिणाम की चिंता नहीं करे। अच्छे अंक ही सफलता की गारंटी नहीं होते।

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