मोदी को बदनाम करने के षड्यंत्र के तहत इशरत के हलफनामे को बदला गया :सरकार

761

rajnath
इशरत जहां मामले में पिछली संप्रग सरकार पर फ्लिप फ्लॉप करने का आरोप लगाते हुए सरकार ने आज कहा कि ऐसा करना गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने और फंसाने की गहरी साजिश का हिस्सा था और मामले की तह तक जाकर इस बारे में अंतिम निर्णय किया जाएगा।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गृह मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि इशरत को पहले आतंकी बताने और बाद में उससे पीछे हट जाने संबंधी दो हलफनामे किन परिस्थितियों में दाखिल किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में कुछ दस्तावेज लापता हैं। लेकिन मंत्रालय के स्तर पर आंतरिक छानबीन की जा रही है और सारे तथ्य एकत्रित किये जा रहे हैं जिसके बाद सोच-समझकर अंतिम निर्णय पर पहुंचा जाएगा।

लोकसभा में कुछ सदस्यों द्वारा ‘‘इशरत जहां मामले से सबंधित शपथपत्र में कथित फेरबदल’’ के बारे में पेश ध्यानाकषर्ण प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में सिंह ने यह बातें कहीं।

उन्होंने कहा, पिछली संप्रग सरकार ने इस तथ्य पर पर्दा डालने का प्रयास किया कि इशरत जहां लश्कर ए तैयबा आपरेटिव थी, हालांकि अपने पहले हल्फनामे में उसने यह बात स्वीकार की थी लेकिन एक महीने बाद ही उस हलफनामे को बदल दिया।

उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले के षडयंत्रकारी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही से साबित हो गया है कि इशरत के लश्कर ए तैयबा से संबंध थे जैसा कि संप्रग सरकार के समय के पहले हलफनामे में भी स्वीकार किया गया था।

सिंह ने कहा कि पहले इशरत को लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव बताने वाला हलफनामा छह अगस्त 2009 को गुजरात उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया था लेकिन अगले महीने ही 24 सितंबर को दूसरा हलफनामा दाखिल कर उसे आतंकवादी मानने से इनकार कर दिया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here