संघ का गणवेष बदला, खाकी निकर की जगह भूरे रंग की फुल पैंट,लालू ने कहा फिर पहनायेंगे हाफ पैंट

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पिछले 91 साल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहचान रहे खाकी रंग के निकर अब इस संगठन के गणवेश से बाहर हो जाएंगे और समय के साथ बदलाव ला रहे संगठन की पहचान अब भूरे रंग की पतलून बनेगी।

संघ की नीति निर्धारक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की यहां आयोजित तीन दिवसीय सालाना बैठक में यह फैसला किया गया।

संघ के सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा, हमने खाकी निकर की जगह भूरे रंग की पैंट को गणवेश में शामिल करने का निर्णय लिया है। हम अडि़यल रुख नहीं रखते और समय के अनुसार फैसले लेते हैं। साल 1925 में संघ की स्थापना के बाद से ढीला-ढाला खाकी निकर संगठन की पहचान रहा है।

शुरू में 1940 तक संघ के गणवेश में खाकी कमीज और निकर होते थे और बाद में सफेद कमीज इसमें शामिल हो गयी।

जोशी ने इसे बड़ा बदलाव बताते हुए कहा, आज के सामाजिक जीवन में पैंट नियमित रूप से शामिल है और इसी को देखते हुए हमने हमारा फैसला किया।

संघ पदाधिकारी ने प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा, हमने भूरे रंग पर फैसला किया जिसकी कोई विशेष वजह नहीं है बल्कि यह आराम से उपलब्ध है और अच्छा दिखाई देता है।

क्या इससे संघ स्वयंसेवकों की पहचान पर कोई असर पड़ेगा, इस प्रश्न पर जोशी ने कहा कि इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा और अगले चार-छह महीने में इसे सहजता से स्वीकार किया जाएगा।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा है कि आरएसएस अब हाफ पैंट छोड़ फूल पैंट में आ गया है. सत्ता मिलने के बाद ये लोग अब अप टू डेट हो गया है. हमलोग फिर आरएसएस को हाफ पैंट पहनायेंगे.

आरएसएस के घोर विरोधी प्रसाद के निशाने पर हमेशा से आरएसएस रहा है. राजद के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी आरएसएस के हाफ पैंट पर गंभीर प्रतिक्रिया में कहा था कि संघ के बुजुर्ग नेता भी हाफ पैंट पहनते हैं. इन्हें शर्म नहीं आती है.

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