पारसियों ने खुद को कभी अल्पसंख्यक नहीं माना: अरुण जेटली

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केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत के सबसे छोटे समुदाय पारसी ने कभी खुद को अल्पसंख्यक नहीं महसूस किया। इसी मानसिकता ने उन्हें दूसरों के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरने का मौका दिया। अल्पसंख्यक मामलों और संस्कृति मंत्रालयों की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने विविध क्षेत्रों में योगदान के लिए उदार पारसियों की तारीफ की।

उन्होंने कहा कि पारसी विपरीत हालात में ईरान से भारत आए। उन्होंने अपनी संस्कृति संरक्षित रखी है। चाहे उद्योग हो, सेना हो, कानूनी पेशा हो, वास्तुकला हो या सिविल सेवाएं हो, हर जगह शीर्ष पर पहुंचने की क्षमता दिखाई है।

जेटली ने प्रस्ताव किया कि गुजरात के जिस उदवाडा शहर में ये सदियों पहले आए थे, उसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने उस शहर के विकास के लिए पहल की थी।

जेटली ने रेखांकित किया कि जहां ब्रिटिश संसद में एक पारसी सदस्य है, भारतीय संसद में कोई नहीं है। पारसी समुदाय की नामी-गिरामी हस्तियों और ब्रिटिश सांसद करण बिलिमोरिया के साथ केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला, महेश शर्मा और मुख्तार अब्बास नकवी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

मोदी ने पारसियों के योगदान को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए योगदान देने के लिए पारसी समुदाय की सराहना की। मोदी ने एक संदेश में कहा कि पारसी समुदाय की समृद्ध संस्कृति महत्वपूर्ण और देश की अमूल्य विरासत का अभिन्न हिस्सा है। मोदी का यह संदेश अल्पसंख्यक मामलों के सचिव राकेश गर्ग ने यहां प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में दिया। संदेश में कहा गया है कि मुझे उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी लोगों को राष्ट्रीय एकता और विकास के लिए पारसियों द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों के प्रति जागरूक करेगी।

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