कई देशों के स्टेट एक्टर्स का परमाणु तस्करों और आतंकवादियों के साथ काम करना सबसे बड़ा खतरा : मोदी

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पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि कुछ देशों की सरकार की ओर से सक्रिय तत्व परमाणु तस्करों और आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे आज परमाणु सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है। साथ ही उन्होंने इस धारणा को त्यागने की अपील की कि आतंकवाद किसी और की समस्या है क्योंकि ‘‘उसका आतंकवाद, मेरा आतंकवाद’’ जैसी कोई चीज नहीं होती है। ब्रसेल्स में हाल के आतंकी हमले का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि ब्रसेल्स हमले से परमाणु सुरक्षा को आतंकवाद से पैदा हुए वास्तविक और तात्कालिक खतरों का पता चलता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जाना चाहिए और सभी देशों को अपनी अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं का पालन करना चाहिए।

उन्होंने आईएईए के परमाणु सुरक्षा कोष में भारत की ओर से 10 लाख डालर का योगदान देने की भी घोषणा की। भारत ने दूसरी बार ऐसा योगदान किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा दिए गए रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री ने परमाणु सुरक्षा के खतरों पर अपनी बात रखते हुए विश्व से आतंकवाद के तीन समकालिक लक्षणों पर ध्यान देने का आह्वान किया और कहा कि पहला इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि आतंकवाद थिएटर की तरह अति हिंसा का इस्तेमाल करता है।

मोदी ने कहा कि दूसरा, हम आज गुफा में छिपे एक आदमी को तलाश नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम एक शहर में एक आतंकवादी की खोज कर रहे हैं जिसके पास कंप्यूटर और स्मार्टफोन है।

पाकिस्तान का नाम लिये बिना उन्होंने कहा, ‘‘ तीसरा, कई देशों की सरकारों की ओर से सक्रिय तत्व :स्टेट एक्टर्स: परमाणु तस्करों और आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है। ’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ मौजूदा दौर में आतंकवाद 21वीं सदी की तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। आज आतंकवाद का नेटवर्क पूरी दुनिया में है, लेकिन हम इस चुनौती से सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर लड़ रहे हैं। ’’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद की पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला वैश्विक है, लेकिन इससे निपटने के लिए देशों के बीच वास्तविक सहयोग बिल्कुल नहीं है।

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