जटिंगा गाँव: जहाँ पक्षियों की आत्महत्या को सुलझाया नहीं जा सका

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असम में एक हिलस्‍टेशन है जटिंगा | जहां आपको आसानी से प्रकृति अपने आगोश में ले लेती है। लेकिन यहाँ होने वाली विचित्र घटना पर्यटकों को आधी रात में उठने के लिए मजबूर कर देती है। छोटे-से इस पहाड़ी गांव हर वर्ष 3-4 महीनों के बीच यह  विचित्र एवं रहस्यमयी घटना घटती है,जिसने विश्वभर के वैज्ञानिकों को भी चकित कर रखा है।

असम के बोरैल हिल्स क्षेत्र में स्थित जटिंगा में हर साल अगस्त-अक्तूबर के दरमियान एक विचित्र एवं रहस्यमयी घटना घटती है ! वैसे तो चारों और हरियाली से घिरे इस हिल स्टेशन पर पर्यटक खुद ब खुद खिचे चले आते है, पहाड़ियां और पहाड़ों पर बहती धारायों के दृश्‍य इसे अवकाश के लिए एक आदर्श स्‍थान बनाती हैं। पर्यटक यात्रा के दौरान स्थानीय कला और कलाकृतियों  की खूब जमकर खरीददारी भी करते हैं। 

परन्तु कुछ विशेष परिस्थितियों में जटिंगा में रात में जलाए गए किसी भी रोशनी की ओर बीसियों पक्षी आकर्षित होकर आते हैं, कुछ-कुछ वैसे ही जैसे अन्य जगहों में दिए की ओर पतंगे आते हैं। पक्षियों के आकर्षित होने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों का होना जरूरी हैः- अमावास की रात हो, हल्की बारिश गिर रही हो, धुंध छाया हुआ हो और हवा का बहाव दक्षिण से पश्चिम की ओर हो। पक्षियों का यह अनोखा व्यवहार केवल जटिंगा में देखा जाता है, आसपास के अन्य गांवों में नहीं। रात को सैकड़ों पक्षी बिल्डिंग्स और पेड़ों की ओर उड़ते हुए जाते हैं और उनसे टकराकर मर जाते हैं। ऐसा जटिंगा के डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में ही होता है। यह क्यों होता है इस बारे में अब तक कोई वैज्ञानिक तथ्य सामने नहीं आया है। हैरत की बात तो यह है कि ऐसा केवल अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच ही होता है। बावजूद इसके जटिंगा असम में सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है।

पक्षी विज्ञान पर सालों से काम कर रहे विशेषज्ञों की मानें तो जटिंगा माइग्रेटरी बर्ड्स की पसंदीदा सैरगाह  है। यहां साल भर प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा लगा रहता है। पक्षियों के दिशाभ्रमित होने के पीछे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक कारकों का नतीजा मानते हैं, लेकिन आजतक इसका कोई पुख्‍ता सबूत नहीं मिल सका है। दरअसल इसके अन्‍य कारण भी हैं। 

 

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