एनपीए के दबाव से घाटे से उबर नहीं पा रहे बैंक

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पिछले वित्तीय वर्ष की चारों तिमाही गुजर जाने के बाद भी बैंकों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आया है.जिन तीन सरकारी बैंकों के नतीजे आए हैं उससे स्पष्ट है कि सभी बैंक एनपीए के दलदल में फंसे हैं. ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली मदद भी नाकाफी रहेगी.

बैंक आफ बड़ोदा की सकल एनपीए की राशि 40 करोड़ रुपए से अधिक की हो गई.जो कुल अग्रिम राशि का 10 फीसद है.एक साल पहले यह राशि 16 करोड़ से अधिक थी. इस वजह से बैंक को इस तिमाही में 3230.14 करोड़ की हानि हुई. इसी तरह ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स ने भले ही इस तिमाही में 21.6 करोड़ का लाभ कमाने में सफल रही हो लेकिन अन्य सभी मानकों पर बैंक की
एनपीए 5.18 फीसद से बढकर 9.6 फीसद हो गया है.ब्याज से होने वाली आय में कमी हुई है. यूको बैंक को गत वित्त वर्ष के दौरान 2788.2 करोड़ का घाटा हुआ है.जबकि एक वर्ष पहले बैंक ने इस तिमाही में 1138 करोड़ का मुनाफा कमाया था.आय भी घटी और एनपीए बढ़ गया.

बैंकों में यह भारी भरकम हानि इसलिए भी हो रही है क्योंकि आरबीआई के निर्देश के मुताबिक अपने सभी फंसे कर्ज का खुलासा मार्च 17 तक करना है.सरकार ने 2016-17 के दौरान इन बैंकों को 25 हजार करोड़ रुपए की मदद का प्रावधान किया है.लेकिन बैंकों की बिगडती माली हालत को देखते हुए यह रकम भी नाकाफी रहेगी

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