SC ने दी मरीन गिरोने को इटली जाने की इजाजत, लेकिन रखीं चार शर्तें

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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 में केरल तट पर दो मछुआरों की हत्या करने के आरोपी दो इतालवी मरीनों में से एक साल्वाटोर गिरोने की जमानत संबंधी शर्तों में आज रियायत दी और भारत एवं इटली के बीच क्षेत्राधिकार के मामले पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसला लेने तक उसे अपने देश में रहने की अनुमति दी।

एक अन्य इतावली मरीन मैसिमिलियानो लाटोर स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर पहले ही इटली में है और न्यायालय ने वहां उसके रहने की तिथि इस वर्ष 30 सितंबर तक के लिए हाल में बढ़ा दी थी।

न्यायमूर्ति पी सी पंत और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड की अवकाशकालीन पीठ ने यहां इतालवी राजदूत से एक नया वादा मांगते हुए कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (आईएटी) क्षेत्राधिकार के मामले में भारत के पक्ष में फैसला सुनाता है तो मरीन को एक माह में वापस लाने की जिम्मेदारी उनकी होगी।

चार शर्तें

न्यायालय ने मरीन पर चार शर्तें लगाईं और कहा कि उसे हर महीने के पहले बुधवार को इटली के पुलिस थाने में पेश होना होगा और इतावली दूतावास को इस बारे में रोम में भारतीय दूतावास को सूचित करना होगा।

उसने कहा कि मरीन किसी साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और इस मामले में किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा।

मरीन पर तीसरी शर्त यह लागू की गई कि वह सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहने का वादा करेगा।

कोर्ट ने कहा कि आखिरी शर्त यह है कि यदि उसे लागू की गई किसी भी शर्त का उल्लंघन करते पाया जाता है तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पी एस नरसिम्हा ने कहा कि यदि गिरोने कोर्ट द्वारा लागू की गईं शर्तों का पालन करता है तो केंद्र को उसकी याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है।

नरसिम्हा ने कहा, हम अदालत द्वारा लागू शर्तों का पालन करने की सूरत में मानवीय आधार पर इस याचिका का समर्थन करते हैं।

गिरोने इस समय सुप्रीम कोर्ट की हिरासत में है और यहां इतालवी दूतावास में रह रहा है। उसने वकील जगजीत सिंह छाबड़ा के जरिए याचिका दर्ज कराई थी और यह भी अनुरोध किया था कि गृह मंत्रालय एवं विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से उसे आवश्यक आवासीय परमिट और बाहर निकलने के लिए वीजा मुहैया कराने को कहा जाए।

ये है मामला

एनरिका लेक्सी पोत पर सवार मरीनों पर 15 फरवरी 2012 को केरल के तट पर दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने का आरोप है।

इस मामले में दोनों इतालवी मरीनों के खिलाफ अभियोग चलाने के अधिकार पर इटली और भारत विरोधाभासी दावे पेश कर रहे हैं।

गिरोने ने यह भी कहा था कि आव्रजन ब्यूरो, संबंधित सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा अधिकारियों समेत इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अधिकारियों को न्यायालय के इस आदेश के बारे में सूचित कराया जाए कि वह भारत से जा सकता है।

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