ओबामा से मिले PM मोदी, अमेरिका ने किया NSG-MTCR में सदस्यता का समर्थन

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अमेरिका के समर्थन से मिसाइल टेक्नॉलॉजी को नियंत्रण करने वाली संस्था की सदस्यता का रास्ता साफ हो गया है. इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप एनएसजी में भारत की एंट्री को अमेरिका का समर्थन मिला.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि भारत और अमेरिका के लिए साझेदारी को मजबूती प्रदान करना और उसे व्यापक बनाना स्वाभाविक है. ओबामा ने एनएसजी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को समर्थन जताया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबामा के साथ बातचीत के बाद कहा, हमने चर्चा की कि आर्थिक संबंधों को नयी उंचाइयों तक कैसे ले जाया जाए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आज इस साल हुए पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में खुद को शामिल करने की प्रतिबद्धता जताई जिससे एतिहासिक करार को लागू किये जाने की दिशा में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय गति मिलेगी.

व्हाइट हाउस ने कहा, ‘‘अमेरिका इस साल जल्द से जल्द समझौते में शामिल होने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है. भारत ने भी इसी तरह इस साझा उद्देश्य की दिशा में काम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.’’ व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका और भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में जलवायु और स्वच्छ उर्जा के समान हित साझा करते हैं और करीबी साझेदार हैं.

बयान के अनुसार दोनों देशों के नेतृत्व ने जलवायु परिवर्तन की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई को प्रेरित करने में मदद की है और इसके नतीजतन पिछले साल दिसंबर में ऐतिहासिक पेरिस समझौते को अंतिम रूप दिया गया.

व्हाइट हाउस ने ओबामा और मोदी की ओवल ऑफिस मुलाकात के बाद कहा, ‘‘दोनों देश जलवायु परिवर्तन के तात्कालिक खतरों पर ध्यान देने के लिए पेरिस समझौते के पूरी तरह क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के लिहाज से मिलकर काम करने और अन्य देशों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’’ प्रधानमंत्री फिलहाल राष्ट्रपति ओबामा के निमंत्रण पर तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा पर हैं.

दोनों नेताओं के बीच वार्ता का एक प्रमुख विषय जलवायु परिवर्तन रहा.

मुलाकात में ओबामा और मोदी ने 2020 से पहले की अवधि में कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की विकास रणनीतियों का अनुसरण करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

चीन ने भारत को एनएसजी सदस्यों में शामिल करने पर आमराय बनाने पर जोर दिया
अमेरिका के साथ रणनीतिक वार्ता के दौरान परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत को शामिल किए जाने पर चर्चा के सवाल पर चीन आज चुप्पी साधे रहा. लेकिन उसने इस मुद्दे पर समूह में पूरी तरह से चर्चा किए जाने और आमराय बनाने पर जोर दिया.

चीन के विदेश मंत्रालय ने पीटीआई के एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि जो देश परमाणु हथियार अप्रसार समूह संधि :एनपीटी: में शामिल नहीं है उसे एनएसजी में शामिल किए जाने के विषय पर इसके अंदर सदस्यों में अब भी मतभेद है.

मंत्रालय एनएसजी के लिए भारत द्वारा स्विटजरलैंड का समर्थन हासिल करने और अमेरिका के साथ रणनीतिक एवं आर्थिक वार्ता में मुद्दे के उठने के सवाल पर जवाब दे रहा था.

मंत्रालय ने कहा है कि इस मुद्दे पर आमराय बनाने के लिए समूह के अंदर लगातार और पूरी तरह से चर्चा किए जाने तथा सहमति के आधार पर कोई फैसला किए जाने का चीन पक्षधर है.

यह हाल के हफ्तों में भारतीय मीडिया में चीन के रूख पर स्पष्ट रूप से सामने आया है.

हालांकि मंत्रालय ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या इस मुद्दे पर रणनीतिक वार्ता के दौरान चर्चा हुई जो द्विपक्षीय संबंधों और चीन एवं अमेरिका के बहुपक्षीय मुद्दों के सभी पहलुओं से जुड़ी हुई है.

अमेरिका ने 48 सदस्यीय एनएसजी में भारत को शामिल किए जाने का समर्थन किया है जबकि चीन कथित तौर पर पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है हालांकि इसका कहना है कि पाकिस्तान ने भी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं.

यह मुद्दा नौ जून को वियना में एनएसजी की पूर्ण बैठक में उठने की उम्मीद है.

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