IAS के विवादित बोल, 94 फीसदी फांसी दलितों और मुस्लिमों को क्यों

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लगता है विवादों में बना रहना छण्तीसगढ़ कैडर के आईएएस एलेक्स पल मेनन का शगल बन गया है। तभी एक विवाद खतम होता है, दूसरे मामले में वे चर्चा में आ जाते हैं। ताजा मामला तो कुछ ज्यादा ही गंभीर है। उन्होंने सीधे न्यायापालिका पर सवाल उठा दिया है।

अपने फेसबुक वाल पर मेनन ने सवाल लिखा है कि आखिर, 94 फीसदी फांसी दलितों और मुस्लिमों को क्यों होती है। मेनन की इस पोस्ट की सूबे में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। सोशल मीडिया पर उनकी इस सोच की मंगलवार को दिन भी भर्त्सना की गई।

मेनन 2006 बैच के आईएएस हैं। पहली बार वे सुर्खियो में तब आए थे, जब सुकमा कलेक्टर रहने के दौरान नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया था। तब भी मेनन की ही चूक मानी गई थी। मात्र दो सुरक्षाकर्मियों को लेकर वे जंगल में चले गए थे। माओवादियों ने दोनों सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी। परन्तु मेनन को नक्सलियों ने रिहा कर दिया था। बलरामपुर कलेक्टर रहने के दौरान जेएनयू एपीसोड के दौरान भी मेनन ने कन्हैया के समर्थन में पोस्ट किया था।

इसको लेकर कैबिनेट की बैठक में हंगामा हुआ था। सभी मंत्री मेनन के खिलाफ कार्रवाई पर अड़ गए थे। सरकार ने तब कलेक्टरी से हटाकर छण्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी का सीईओ बना दिया। बलरामपुर में कलेक्टर रहने के समय वे विवादास्पद रहे। एक राजनीतिज्ञ ने किसी काम के लिए उन्हें फोन किया तो उसे रिकार्ड कर फेसबुक पर अपलोड कर दिया था।

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