गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के सभी 14 विधेयक लौटाए

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kejarimanish

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के चौदह विधेयकों को वापस लौटा दिया है। इनमें लोकपाल विधेयक सहित शिक्षा व अन्य मुद्दों से जुड़े विधेयक शामिल हैं।

मंत्रालय ने विधेयक लौटाए जाने की वजह दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करना बताया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में विधेयकों को पारित कराने की एक प्रक्रिया है। इसके तहत विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने से पहले विधायी प्रस्ताव अनुमोदन के लिए केंद्र सरकार को भेजना होता है, लेकिन उपराज्यपाल के जरिये केंद्र को प्रस्ताव भेजे बिना पहले विधानसभा में विधेयकों को पारित कराया गया। दिल्ली सरकार के इस तर्क को भी गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया है कि विधेयकों को पारित कराने के बाद भी अनुमोदन लेने का नियम है। मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इस तरह का नियम आपात स्थिति के लिए है। अगर कोई अपरिहार्य स्थिति है, तो इस तरह के नियमों का उपयोग किया जा सकता है।

गौरतलब है कि विधेयक लौटाने से पहले केंद्र सरकार की ओर से कुछ विधेयकों पर दिल्ली सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जबकि कुछ अन्य विधेयकों पर केंद्र के अन्य मंत्रालयों से राय ली गई थी।

इन विधेयकों पर नहीं लगी मुहर
दिल्ली सरकार की ओर से संसदीय सचिवों से संबद्ध विधेयक तीन अन्य विधेयकों के साथ गृह मंत्रालय को भेजा गया था। इनमें दिल्ली सुभाष चंद्र यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलाजी बिल 2015, दिल्ली समयबद्ध सेवा प्रदाता नागरिक अधिकार विधेयक संशोधन विधेयक 2015 और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड संशोधन विधेयक 2015 शामिल है। यह विधेयक पिछले साल दिसंबर में गृह मंत्रालय को मिले थे। इन सभी को मंजूरी के बिना वापस भेज दिया गया है।

शिक्षा से जुड़े विधेयक भी लटके
दिल्ली स्कूल लेखा सत्यापन व अधिक फीस वापसी विधेयक 2015, दिल्ली स्कूल शिक्षा संशोधन बिल 2015 और दिल्ली मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक 2015 भी अनुमोदन के लिए गृह मंत्रालय को भेजे गए थे। तीन शिक्षा विधेयकों के जन लोकपाल जैसा महत्वपूर्ण विधेयक भी केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा गया था। अन्य विधेयकों में वर्किंग जर्नलिस्ट और अन्य समाचार पत्र कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़ा संशोधन विधेयक और अपराध प्रक्रिया संशोधन विधेयक 2015 शामिल हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि दिल्ली सरकार को प्रक्रिया का पालन करते हुए विधेयक फिर से भेजना चाहिए।

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