शहीद वीर सिंह की समाधि के लिए जगह न मिलने के पीछे आखिर क्या है सच्चाई !

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पंपोर हमले में शहीद वीर सिंह फिरोजाबाद के एक छोटे से गाँव कन्थरी के रहने वाले थे इनका परिवार अभी भी यही रहता है इनके भाई और बाप मजदूरी करते हैं |

शहीद वीर सिंह के मृत शरीर को जब दाह संस्कार के लिए उनके पैत्रक गाँव लाया गया तो दाह संस्कार में विवाद खड़ा हो गया जिसे मेन स्ट्रीम मीडिया ने ये कहकर प्रसारित किया कि निम्न जाति का होने के कारण उन्हें सार्वजानिक स्थल पर समाधि नहीं बनाने दी गई जबकि मामला कुछ और ही था | समाधि न बनाने देने का कारण निम्न जाति का होना नहीं था बल्कि जिस सार्वजानिक स्थल की जमीन की मांग उनके परिवारीजनों ने की थी उस स्थान पर प्रत्येक वर्ष ग्रामीण मेला लगता है इस वजह से मेला कमेटी ने उस स्थान पर समाधि बनाने पर आपत्ति की थी जिसे मीडिया में गलत तरीके से चलाया गया | जिस खबर को जातीय भेदभाव बताकर चलाया गया दरअसल वो मेला कमेटी और शहीद के परिजनों के मध्य था | क्या इससे पहले कभी शहीद वीर सिंह के किसी परिजन का दाह संस्कार उस गाँव में नहीं हुआ होगा ? अगर विवाद दाह संस्कार को लेकर होता तो पहले भी ये सामने आता लेकिन ऐसा कोई विवाद था ही नहीं |

बाद में विवाद को बढ़ता देख और मीडिया में गलत ख़बरें चलते देख आखिरकार ग्रामीणों ने 10 वर्गमीटर जमीन शहीद वीर सिंह की समाधि के लिए दे दी |

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