मोदी टीम में 10 राज्यों से 19 चेहरे, कठेरिया और निहालचंद सहित 6 मंत्रियों का इस्तीफा

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cabinet-05-07-2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो साल के कार्यकाल में मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार के बाद छह मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही मंत्रियों की छुट्टी से जुड़ा कयास खत्म हो गया.

राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद निहाल चंद, रामशंकर कठेरिया, सांवरलाल जाट, मनसुख बसावा, मोहन कुंडारिया और जीएम सिद्धेश्वर ने मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया.

 

पीएम मोदी की टीम में मंगलवार को 19 चेहरों को शामिल किया गया, जिसमें यूपी से 3, राजस्थान से 3, गुजरात से 3, एमपी से 3, महाराष्ट्र से 2, उत्तराखंड से 1, पश्चिम बंगाल से 1, दिल्ली से 1, असम से 1 और कर्नाटक से 1 सांसद को मंत्री बनाया गया। केंद्र में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार प्रकाश जावडेकर को प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में इन नए चेहरों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।

मोदी टीम में नए चेहरे

1- फगन सिंह कुलस्ते- राज्य मंत्री के तौर पर शपथ, एमपी के मंडला से सांसद हैं। वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं। नोट के बदले वोट कांड में जेल जा चुके हैं।

2- एस एस अहलूवालिया- राज्य मंत्री के तौर पर शपथ, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से भाजपा सांसद हैं। पहली बार लोकसभा सदस्य हैं, 1995 में मंत्री रह चुके हैं। पी वी नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में मंत्री से लेकर प्रमुख विधेयकों पर भाजपा के लिए शोधकर्ता की जिम्मेदारी निभा चुके आहलूवालिया के पार्टी लाइन से हटकर सभी दलों से संपर्क हैं और शब्दों को तौलकर बोलने के लिए पहचाना जाता है।

3- रमेश चंदप्पा- राज्य मंत्री के तौर पर शपथ, कर्नाटक के बीजापुर से भाजपा सांसद हैं। कनार्टक में भाजपा का दलित चेहरा माने जाते हैं। 5 बार से लोकसभा सांसद हैं।

4- विजय गोयल- राज्य मंत्री के तौर पर शपथ, दिल्ली भाजपा का जाना माना चेहरा हैं और राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं। वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रहे हैं। मीडिया में पैठ रखने वाले गोयल की पहचान एक कुशल नेता के बतौर होती है। पार्टी के एक हिस्से का मानना है कि उनका इस्तेमाल आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की काट के लिए किया जाएगा। आप और केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लगातार हमले कर रहे हैं और इन हमलों के मुकाबले के लिए अकसर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को उतरना पड़ता है क्योंकि पार्टी का राज्य नेतृत्व इस मामले में ज्यादातर निष्प्रभावी दिखता है।

5- रामदास अाठवाले- महाराष्ट्र से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के राज्य सभा सांसद हैं। राजग के सहयोगी हैं। यह दलित चेहरा हैं। पहली बार केंद्र में राज्य मंत्री बने हैं।

6- राजेन गोहने- असम के नगांव से भाजपा सांसद हैं। वहां पर भाजपा को स्थापित करने का श्रेय इनको है। चार बार से सांसद हैं और पहली बार केंद्र में राज्य मंत्री बने हैं।

7- अनिल माधव दवे- एमपी से राज्य सभा सांसद हैं, राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रहे दवे का जन्म 1956 में उज्जैन के बड़नगर में हुआ। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे दवे कॉलेज के समय छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे। आठ साल की उम्र में संघ के स्वयंसेवक बने दवे ने 1988 से 2004 के बीच संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के तौर पर भी काम किया।

एक बेहतरीन चुनाव प्रबंधन रणनीतिकार के तौर पर पहचाने जाने वाले दवे मध्यप्रदेश के तीन विधानसभा चुनावों 2003, 2008 और 2013 और 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में मप्र भारतीय जनता पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख रह चुके हैं। वे वर्ष 2009 से राज्यसभा सांसद हैं। इसके अलावा वे संसद की कई अहम समितियों के सदस्य भी हैं।

8- पुरूषोत्तम भाई रूपाला- गुजरात से राज्य सभा सांसद हैं। मोदी के करीबी माने जाते हैं और वहां के बड़े नेता हैं। राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली।

9- एम जे अकबर– एमपी से राज्यसभा सांसद हैं और जाने माने पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है। पत्रकारिता से राजनीति में आए मध्यप्रदेश से पिछले ही महीने राज्यसभा सांसद बने अकबर इसके पहले पिछले साल जुलाई में झारखंड से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। साल 1989 से 1991 में बिहार के किशनगंज से कांग्रेस लोकसभा सांसद रहे अकबर ने 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले ही भारतीय जनता पार्टी का हाथ थामा था। वे साल 1991 से 1993 के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय के परामर्शकार भी रह चुके हैं।

साल 1951 में पश्चिम बंगाल के हुगली में जन्मे अकबर भाजपा में आने के पहले पत्रकार के तौर पर देश के कई ख्यातिप्राप्त प्रकाशनों से जुड़े रह चुके हैं। वे एक ख्यातिप्राप्त स्तंभकार और कई किताबों के लेखक भी हैं।

10- अर्जुनराम मेघवाल- राजस्थान के बीकानेर से भाजपा सांसद हैं, राज्य में दलित चेहरा हैं। राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है। मेघवाल की पहचान सादगी एवं पर्यावरण प्रेमी के रूप में रही हैं तथा पर्यावरण का संदेश देने के लिए वे संसद में भी साइकिल से जाते हैं। वह राजस्थान के बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से लगातार दो बार सांसद चुने गए हैं तथा इससे पूर्व वे भारतीय प्रसाशनिक सेवा के अधिकारी रहे थे। उनका नाम संसद में सक्रिय सांसदों की सूची में शामिल है। अपने पिछले कार्यकाल में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की निगाह में चढ़ गये थे। लोकसभा में सर्वाधिक सवाल जवाब करने और सर्वाधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले सांसदों में दूसरे स्थान पर रहे मेघवाल को सांसद रत्न से भी नवाजा गया।

11- जसवंत सिंह भाभोर- गुजरात के दाहोद के सांसद हैं, आदिवासी समुदाय के नेता हैं। राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है।

12- महेंद्र नाथ पांडे- यूपी के चंदौली से सांसद हैं और वह राजनाथ सिंह के गृह जिले से आते हैं। पहली बार केंद्र में राज्य मंत्री बने हैं। पांडे राज्य के पूर्वी हिस्सों में कद्दावर ब्राह्मण नेता के रुप में जाने जाते हैं। वह पहली बार सांसद बने। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के दो बार सदस्य रह चुके हैं। वह राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री थे। वह कल्याण सिंह मंत्रिमण्डल में भी मंत्री रह चुके हैं।

मूलरुप से गाजीपुर के रहने वाले पांडे की शिक्षा दीक्षा वाराणसी में हुई है। वह छात्र जीवन से ही राजनीति में हैं। वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय(बीएचयू) छात्रसंघ के महामंत्री भी रह चुके हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक सदस्य रहे हैं।

13- अजय टम्टा- उत्तराखंड के उल्मोड़ा से सांसद हैं, भाजपा का दलित चेहरा माने जाते हैं। मोदी सरकार में पहली बार उत्तराखंड से किसी को मंत्री पद मिला है। वह राज्य मंत्री बनाए गए हैं। वह 12वीं पास हैं।

14- कृष्णा राज- यूपी के शाहजहांपुर से भाजपा सांसद हैं। वह यूपी में भाजपा की दलित नेता हैं। राज्य मंत्री बनाया गया है। छात्र जीवन से ही राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं राज का जन्म 22 फरवरी 1967 को फैजाबाद में हुआ था। पढाई के समय से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की समर्थक रहीं राज उत्तर प्रदेश विधानसभा की मोहम्मदी सीट से 1996 और 2007 के चुनाव में विधायक चुनी गयी थीं। 2014 में शाहजहांपुर (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़कर वह लोकसभा पहुंचीं। 2014 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता मिथिलेश कुमार को हराया था।

15- मनसुख मंडाविया- गुजरात से राज्यसभा के सांसद हैं। राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है।

16- अनुप्रिया सिंह पटेल- यूपी के मिर्जापुर से अपना दल की सांसद हैं और राजग की सहयोगी हैं। कुर्मी नेता सोनेलाल पटेल की बेटी हैं। राज्य मंत्री बनाई गई हैं। अपनी मां कृष्णा पटेल से पार्टी में वर्चस्व की लडाई लड़ रही अनुप्रिया पटेल का जन्म कानपुर में 28 अप्रैल 1981 को हुआ था। अनुप्रिया पटेल ने लेडी श्रीराम कालेज फार वोमेन एमिटी विश्वविद्यालय और कानपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने मनोविज्ञान में परास्नातक डिग्री हासिल की है। उन्होंने एमबीए कर एमिटी विश्वविद्यालय में पढाया भी है।

पिता की मृत्यु के बाद अक्टूबर 2009 में उन्हें अपना दल का महासचिव बनाया गया। उनकी मां कृष्णा पटेल दल की अध्यक्ष बनीं। 2014 में रोहनियां विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में टिकट को लेकर मां से हुए विवाद के बाद अनुप्रिया और उनके कुछ समर्थकों को कृष्णा पटेल ने अपना दल से निष्कासित कर दिया, हालांकि मां-बेटी दोनो ही अपने को असली अपना दल वाला बताती हैं। कृष्णा पटेल के साथ उनकी बडी बेटी भी अपना दल की पदाधिकारी है।

17- सी आर चौधरी- राजस्‍थान के नागौर से पहली बार सांसद बने हैं। उनको राज्य मंत्री बनाया गया है। प्रशासनिक क्षमताओं के बल पर राजनीति को प्रभावित करने वाले नागौर के सांसद सी आर चौधरी मोदी मंत्रिमण्डल में शामिल होने से पहले का सफर भी काफी सुहावना रहा है।

चौधरी काफी समय तक अजमेर में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट तथा अन्य कई पदों पर रहे एवं अपनी व्यवहार कुशलता के कारण काफी लोकप्रिय रहे। अपनी कार्यशैली के कारण राजनीति में जगह बनायी तथा नागौर से सांसद चुने गये। वह राजस्थान लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष भी रहे। अधिकारी के रूप में भी वह काफी लोकप्रिय रहे हैं। जाट समाज के विभिन्न मुद्दों को लेकर उन्होंने न केवल अपनी सक्रियता दिखाई बल्कि नौकरशाही और राजनीति में लौहा भी मनवाया। जाट समाज के संगठनों के जरिये उन्होंने कई सुधारात्मक काम भी किए।

18- पी पी चौधरी- राजस्थान के पाली से पहली बार सांसद बने हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और संविधान के जानकार माने जाते हैं। राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली है। चौधरी ने बहुत कम समय में संसद की गतिविधियों एवं कार्यवाही में शामिल होकर पहचान बनायी तथा दोबार सांसद रत्न से सम्मानित हुए थे। उन्होंने संसद में अठारह निजी विधेयक पेश किये तथा 121 बहस में शामिल हुए और 394 प्रश्न पूछे। इस वजह से वह संसद में लोकप्रिय हो गये तथा उनके विचारों का सम्मान किया जाने लगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन में अधिशाषी सदस्य के रूप में मनोनीत किया। वह क्षेत्र की समस्याओं से लगातार जुडे रहे तथा संसद में आवाज बुलंद की। सीरवी समाज में उनकी काफी प्रतिष्ठा रही है। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय में वकालात की तथा गरीबों को न्याय दिलाया।

19- डॉ सुभाष रामराव भामरे- महाराष्ट्र के धुले से पहली बार सांसद बने हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं। राज्य मंत्री बनाए गए हैं।

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