जाकिर नाईक का आतंक से संबंध? घर और ऑफिस के बहार पुलिस ने बढाई सुरक्षा

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इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक डॉक्टर जाकिर नाईक एक बार फिर से सवालों के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि ढाका आतंकी हमले में शामिल दो युवक डॉ जाकिर नाईक के विचारों और भाषणों से प्रभावित थे। सवाल उठा है कि क्या ढाका हमले के लिए तैयार बारूद का फॉर्मूला मुंबई में बना? वहीं, ईद के मौके पर और शिवसेना की धमकी के बाद पुलिस ने जाकिर नाईक के घर और दफ्तर के बाहर सुरक्षा व्यवस्ता कड़ी कर दी है।

आरोपों को नकारा
डाक्टर जाकिर नाईक उमरा करने सऊदी अरब गए हैं। मुंबई में उनके इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के प्रबंधक मंजूर शेख ने हालांकि इन आरोपों को खारिज किया है। मंजूर शेख का दावा है कि फाउंडेशन में सभी धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। लाइब्रेरी में कुरान है तो वेद, पुराण, गीता और बाईबल भी हैं।

कई मुस्लिम संगठन भी डॉ नाईक के विरोधी
एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त डॉ जाकिर नाईक कभी डोंगरी इलाके में अपना क्लिनिक चलाते थे। सन 1991 के बाद से उनका झुकाव मेडिकल से ज्यादा मज़हबी किताबों की तरफ हो गया। डॉ नाईक के ‘पीस टीवी’ को देखने वाले दुनिया भर में करोड़ों दर्शक हैं। हालांकि विरोधी भी उतने ही बुलंद हैं। दुनियां के कई देशों में पीस टीवी और डॉ नाईक के लिए ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया गया है। यहां तक कि रजा अकादमी जैसे मुस्लिम संगठन ने भी उनकी संस्था पर पाबंदी लगाने की मांग की है। रजा अकादमी के उपाध्यक्ष अमानुल्ला रज़ा का कहना है कि इतने बड़े कार्यक्रम करने के लिए फाउंडेशन के पास पैसे कहां से आते हैं? इसकी जांच होनी चाहिए।

आतंकी कनेक्शन के लिए पहले से शक के दायरे में
डॉ जाकिर आतंकी कनेक्शन को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। 7/11 बम धमाकों में एक आरोपी राहिल रिसर्च फाउंडेशन में आता था। हालांकि जांच में फाउंडेशन के खिलाफ कुछ नहीं मिला और रिसर्च सेंटर बदस्तूर जारी है। हालांकि ज्यादातर अंग्रेजी में ही बोलने वाले डॉ जाकिर नाईक की यही लोकप्रियता अब ढाका आतंकी हमले के बाद एक बार फिर से सवालों के घेरे में है और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर हैं।

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