कर्फ्यू हटते ही कश्मीर में फिर हुई हिंसा

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प्रशासन ने मंगलवार को अनंतनाग को छोड़कर वादी के अन्य सभी जिलों से कर्फ्यू पूरी तरह से हटा लिया, लेकिन इसके साथ ही विभिन्न इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर हिंसा शुरू हो गई। इसके बाद कई जगहों पर पुनः प्रशासनिक पाबंदियां लागू हो गई।

हिंसक झड़पों में एक दर्जन सुरक्षाकर्मियों समेत 30 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। अलबत्ता, कर्फ्यू हटाने के बावजूद न रेल सेवा बहाल हुई और मोबाइल इंटरनेट सेवा। सिर्फ बीएसएनएल की पोस्ट पेड मोबाइल सेवा ही प्रभावी रही।

प्रशासनिक पाबंदियां हटने के बाद श्रीनगर के डाउन-टाउन में ही नहीं वादी में अन्यत्र भी लोगों ने सार्वजनिक स्थलों, गलियां-बाजारों व सड़कों पर राष्ट्रविरोधी नारेबाजी करते जुहर की नमाज अदा की।

वादी में आठ जुलाई को हिज्ब आतंकी बुरहान व उसके दो साथियों के मारे जाने के बाद से ही हालात बिगड़े हुए हैं। हिसक प्रदर्शनों में अब तक 53 लोग मारे जा चुके हैं, पांच हजार से ज्यादा लोग जख्मी हैं। इनमें 3500 के करीब सुरक्षाकर्मी ही हैं। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने कर्फ्यू का सहारा लिया था।

हालात में आंशिक सुधार को देखते हुए प्रशासन ने सुबह श्रीनगर शहर से कर्फ्यू पूरी तरह हटाने का एलान कर दिया। हालांकि बारामुला, गांदरबल, बड़गाम और बांडीपोर में गत रोज भी कर्फ्यू नहीं था, लेकिन कर्फ्यू जैसी प्रशासनिक पाबंदिया थीं, लेकिन मंगलवार को श्रीनगर, बड़गाम, गांदरबल, कुपवाड़ा, बांडीपोर और बारामुला में कर्फ्यू नहीं था।

प्रशासन द्वारा कर्फ्यू हटाए जाने का एलान करते हुए श्रीनगर समेत सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके, लेकिन इनका असर नजर नहीं आया। डाउन-टाउन के काकसराय, छत्ताबल, जांपाकदल, सफाकदल, खानयार, वातलकदल, आलीकदल, फतेहकदल में लोगों ने आजादी समर्थक और भारत विरोधी नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाना शुरू कर दिए।

सुरक्षाबलों ने जब लोगों को रोकना चाहा तो वे पथराव करने लगे। सुरक्षाबलों ने भी उन्हें खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान एक जुलूस ने लालचौक की तरफ बढ़ने का प्रयास किया, जिसे जहांगीर चौक में पुलिस ने रोका और हिसक झड़पें हुईं। मैसूमा में भी हिंसा हुई।

वातलकदल में तीन, छत्ताबल में दो, खानयार में चार तथा काका सराय में चार प्रदर्शनकारी घायल हो गए। पांच सुरक्षाकर्मी भी जख्मी हुए।

हालांकि बारामुला में स्थिति शांत रही, लेकिन सोपोर, पट्टन, पलहालन व तापर और कुपवाड़ा के कुछ हिस्सों के अलावा दक्षिणी कश्मीर के डूरी, यारीपोरा, दम्हाल हांजीपोरा, मुरन, काकापोरा, खुडवनी, काडीपोरा, आंचीडूरा, त्राल, पांपोर, कुलगाम और शोपियां में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिसा हुई। इनमें सात सुरक्षाकर्मियों समेत पांच लोग जख्मी हुए हैं।

नहीं खुली दुकानें

अलगाववादियों मंगलवार को लोगों से दोपहर दो बजे के बाद अपनी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलने को कहा था। कर्फ्यू भी सुबह प्रशासन ने हटा लिया, लेकिन लालचौक, राजबाग, जवाहर नगर समेत सिविल लाइन इलाकों में कुछ दुकानें खुली नजर आई।

लेकिन डाउन-टाउन में दोपहर दो बजे के बाद भी दुकानें बंद रही। कुछ दुकानदारों ने दुकानें खोली थी, लेकिन मोटरसाइकिल पर आए कुछ युवकों ने उनके साथ मारपीट कर दुकानों को बंद करा दिया। अलबत्ता, शहर की सड़कों पर वाहनों की भीड़ खूब रही।

स्कूल-कॉलेज रहे बंद

प्रशासन ने हालांकि दक्षिण कश्मीर के अलावा वादी के अन्य सभी हिस्सों में स्कूल-कॉलेज खोलने का आदेश दिया है। स्कूलों में छुट्टियां भी समाप्त कर दी गई हैं और अभिभावकों से कहा गया है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें, लेकिन किसी इलाके में कोई भी स्कूल नहीं खुला।

गंभीर हालत वाले कैंसर रोगियों को घर पर इलाज की सुविधा

शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान अनुसंधान ने गंभीर हालत वाले कैंसर रोगियों को उनके घरों पर इलाज का बंदोबस्त कर दिया है। ऐसा उसने कश्मीर के हालात को देखते हुए किया है। अनुसंधान के पेन एंड पेलिएटिव यूनिट के हेड प्रोफेसर मुहम्मद अशरफ ने कहा कि रोगियों के परिजनों को अनुसंधान के पेन एंड पलिएटिव केयर यूनिट से टेलीफोन पर संपर्क कर अपना पता लिखवाना है।

डॉक्टर उनके घर आकर रोगी का उपचार करेंगे। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में अनुसंधान में एक हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि इसमें उनका सहयोग कैंसर सोसाइटी ऑफ कश्मीर कर रही है। इसके पूर्व उक्त अस्पताल ने कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए उनके संबंधित जिला, उपजिला अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई थीं।

 

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