यूपी सरकार के मंत्री मेहमानों की करते हैं ज़बरदस्त आवभगत, तभी तो लुटा दिए…..

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हमारे देश में दो ऐसे विषय हैं, जिनके बारे में आपको हर जगह बहस और चर्चा होती मिल जाएगी. पतिपत्नी या फ़िर राजनीति. चाय की चौपाल हो या फ़िर किसी बड़ी कंपनी की कॉफ़ी शॉप. इन विषयों पर लोगों की राय आपको सुनाई दे ही जाएगी. लेकिन इन दोनों विषयों में एक बात आम है और वो है खाना. पतिपत्नी और खाने का रिश्ता तो हम सब समझ गए होंगे, लेकिन राजनीति में खाने का मतलब शायद आप गलत ले गए. ये वो वाला खाना नहीं है, ये असली वाला खाना है.

भारतीय राजनीति में एक कहावत है कि केंद्र की कुर्सी का रास्ता यूपी से हो कर जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी सरकार के मंत्रियों का सत्ता की कुर्सी पर बैठने का सबसे बड़ा कारण क्या है? घोटाले या जनता की सेवा तो शायद दूसरे स्थान पर होगी, पहला स्थान तो चाय, समोसे और गुलाब जामुन ने ले रखा है. कैसे? इसका जवाब आपको यूपी के मंत्रियों द्वारा चाय, समोसों पर खर्च की गई राशि से पता चल जाएगा.

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बीते 4 सालों में यूपी के मंत्रियों ने करीब 9 करोड़ रुपये अपने मेहमानों की खातिरदारी में लगा दिए हैं, और इन खर्चों को नाम दिया है पॉकेट खर्च. इस पॉकेट खर्च को सबसे खुले दिल से खर्च किया है जन कल्याण मंत्री अरुण कुमार खोरी ने. इनका चार साल का पॉकेट खर्च है 22 लाख 93 हज़ार 800 रुपये. वहीं आज़म ख़ान कहां पीछे रहने वाले थे, उन्होंने 22 लाख 86 हज़ार 620 रुपये खर्च कर डाले. इन खर्चों को यूपी सरकार मंत्रियों को वापिस करेगी

इन खर्चों पर आज़म ख़ान का कहना है कि ‘ये खर्चे हम अपने ऊपर नहीं करते, जो लोग हमसे मिलने आते है उन्हें चाय नाश्ता कराना कोई गलत बात है क्या?’. अरुण जी तो दो कदम आगे निकल गए और कहा कि ‘हमें इतने पैसे नहीं मिलते कि हम अपने पैसों से मिलने आए लोगों की आवभगत कर सकें’

Untitledहम ये नहीं कह रहे कि मिलने आने वालों के लिए चाय नाश्ता नहीं होना चाहिए. लेकिन नेता जी ज़रा जवाब देंगे कि कितने आम लोगों से आप मिलते हैं या फ़िर किन गरीबों को आपके ऑफ़िस में चाय पिलाई गई. अपने निजी मेहमानों की आवभगत में जनता के पैसों को लुटाना कहां तक जायज़ है और वो भी बिना किसी प्रमाणित बिल के?

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