दशरथ मांझी के फौलादी इरादों को सुरेश प्रभु का सलाम, उनके गांव को रेल से जोड़ कर देंगे श्रद्धांजलि

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जब भी प्यार की निशानी की बात होती है, लोग ताज़महल की बात करते हैं. पर आपको अगर प्यार की सच्ची निशानी देखनी हो, तो गया के गहलोर गांव में चले आइये. ये प्यार ही तो था, जिसने एक शख्स को सालों तक पहाड़ काटने के लिए मजबूर कर दिया. यहीं है वो रास्ता, जिसे अपनी पत्नी की याद में दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीर कर बनाया था. दिनरात अपने प्यार को याद करते हुए दशरथ जब पहाड़ को तोड़ने के लिए अपना हथौड़ा उठाते, तो उनका प्यार उनके हथौड़े के हर प्रहार में कई गुना ज़्यादा ताकत भर देता था. अभी पिछले साल आपने देखा होगा कि बॉलीवुड ने जबरदस्त फिल्म बना कर दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि दे दी. पर सरकार इस मामले में थोड़ी लेट हो गयी. फिर भी देरसवेर बिहार के इस रियल हीरो को श्रद्धांजलि देने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु उनके गांव गहलोर में रेलवे लाइन बिछाने की सोच रहे हैं.

मांझी का ये गांव चूंकि शहर से सड़क द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. यहां से निकटतम रेलवे स्टेशन जेठियन है, जिसकी इस गांव से दूरी करीब 8 किलोमीटर है.

मांझी ने दशकों पहले पहाड़ काट कर अपने गांव को दूसरे गांव और शहर से जोड़ने के लिए सड़क बना दी थी. गौरतलब है किमांझी की पत्नी सही वक़्त पर हॉस्पिटल पहुंच पाने की वजह से मर गयी थीं, उन्हीं की याद में दशरथ मांझी ने एक विशाल पहाड़ को काट कर रास्ता बना दिया था‘.ऐसा भी माना जाता है कि दशरथ मांझी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने रेलवे लाइन पर पैदल चल कर गया से दिल्ली गए थे.

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इस महान इंसान के लिए इससे बढ़िया श्रद्धांजलि क्या हो सकती है कि पहले जिसके गांव में बाहर जाने के लिए सड़क नहीं थी, आज बस उसके फौलादी इरादों के कारण रेलवे का जाल भी उसके गांव से जुड़ने वाला है.

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