यहां पुलिस मंदिर में निपटाती है विवाद

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गुढ़ा थाने में करीब 40 साल पहले कुएं का निर्माण कराया गया। उसके साथ ही मंदिर का भी निर्माण हुआ था। यह मंदिर कांस्टेबल गोकुलचंद अहीर ने बनाया था। इस मंदिर का एक बार जीर्णोद्घार भी हुआ है। यहां एक पुजारी भी है, जो नियमित रूप से मंदिर पर पूजा-पाठ कराता है। थाने के पास स्थित एक दुकानदार चौथमल शर्मा ने बताया कि पहले थाने में झूठे मामले अधिक आते थे। ये पुलिस के लिए सिरदर्द होते थे। इनमें सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने मंदिर का सहारा लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार मंदिर का सहारा लेते ही झूठे मामलों में एकाएक कमी आ गई थी। इसलिए बाद में हर मामले को मंदिर के चबूतरे पर रखा जाने लगा। एसएचओ माधोराम ने बताया कि क्षेत्र में अमन शांति कायम रहे इसके लिए वे रोजाना मंदिर पर धोक भी लगाते हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले का गुढ़ा पुलिस थाना प्रदेश में अनूठा है। यहां आने वाले परिवादों को लेकर पुलिस अधिकारी जरा भी चिंतित नहीं होते हैं, क्योंकि अधिकांश मामले पुलिस थाने में बने बालाजी मंदिर में ही निपट जाते हैं। सालभर में इस थाने में करीब 1400 मामले आते हैं। ये सभी मामले थाने में बने बालाजी मंदिर की चौखट पर रखे जाते हैं। खास बात यह है कि इनमें से करीब 70 फीसदी मामले मंदिर में ही आपसी सुलह से निपट जाते हैं। क्योंकि भगवान के कोप से बचने के लिए हर आरोपी यहां सच उगल देता हैै। गुढ़ा थाने में आरोपियों को पुलिस वर्दी का नहीं बल्कि भगवान से ज्यादा डर लगता है। कई बार चोरी के आरोपी भी खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए मंदिर में चुराया गया सामान तक रख देते हैं। थाने पर अधिकांश मामलों की बैठक मंदिर पर बने चबूतरे पर ही होती है।

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