जाने क्यों कहा RSS ने : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का साथ देना शैतान के साथ देने जैसा

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 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कहना है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ‘गैर इस्लामिक’ और ‘गैरकानूनी’ है। उनका मानना है कि तीन तलाक मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का साथ देना किसी शैतान के साथ देने के बराबर है।

आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने कहा कि कुरान शरीफ में तीन तलाक और हलाला का जिक्र नहीं है। मुस्लिमों की पवित्र किताब में इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। यह मानवता और महिलाओं पर सबसे बुरा अत्याचार है। इंद्रेश कुमार आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक हैं।

आरएसएस से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक कुमार ने कहा कि इस्लामी सिद्धांत के अनुसार, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक कानूनी संस्थान नहीं है और वह देश में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं।

तो वहीं अहमदाबाद में  आॅल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड (एआईएलपीएलबी) के एक सदस्य ने कहा है कि एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए तलाक देना जानकारी देने का एक अन्य माध्यम है। एआईएमपीएलबी सदस्य हसन रजा ने कहा कि नये युग में संदेश या सोशल मीडिया मैसेजिंग एप्प व्हाट्सएप्प के जरिए तलाक दिया जाना इसी कार्य के लिए पूर्व में पोस्टकार्ड या टेलीग्राम के इस्तेमाल के जैसा ही है।उन्होंने हालांकि इसको लेकर अपना पक्ष नहीं दिया कि तलाक देने का कौन-सा तरीका उचित है।

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