सर्दी में हाथ – पैर ठंडे रहते हैं, तो इसे पढ़ें !

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hand-foot

यूँ तो सर्दी का मौसम हेल्दी सीजन के नाम से जाना जाता है, परन्तु कुछ लोगों के लिए यह अत्यंत कष्टकारी सिद्ध होता है | ठंड में कंपकंपी तो सभी को ही छूटती है पर यदि यह आवश्यकता से अधिक अर्थात जब दूसरे व्यक्ति सामान्य महसूस कर रहे हों यदि उस समय भी आपको  अति ठंड लग रही हो एवं हाथ-पैर ठंड से सुन्न पड़ रहे हों तो सचेत हो जाएँ यह स्थिति किसी गंभीर रोग का लक्षण भी हो सकती है | हाथ-पैर ठंडे रहने के निम्न प्रमुख कारण हो सकते हैं –

कारण :

  1. रक्त संचार का बाधित होना
  2. ह्रदय रोग या निम्न रक्तचाप रहना
  3. शरीर की लम्बाई के अनुपात में वजन कम होना
  4. शरीर में वसा की कमी होना
  5. थायरायड ग्रंथि से कम स्राव (हाइपो थाइराएडिज्म) होना
  6. शरीर में आयरन एवं विटामिन बी – 12 की कमी होना
  7. अत्यधिक तनाव की अवस्था में भी शरीर की ठंड प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है |

बचाव व उपचार :

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें, दिन भर में कम-से कम 2 लीटर पानी का सेवन अवश्य करें | पानी को गुनगुना करके पीना अधिक लाभप्रद होगा | चाय-काफी के स्थान पर सब्जियों के सूप एवं ग्रीन टी का प्रयोग करें |
  • स्नान से पहले एवं बाद में शरीर का घर्षण स्नान करें, इसके लिए अपनी हथेलियों से शरीर को रगड़कर गर्म करें तत्पश्चात स्नान करें | स्नान के बाद भी रोंयेदार तौलिया से पूरे शरीर को रगड़कर पोंछे फिर कपडे पहनें |
  • स्नान से पूर्व यदि 20 मिनट के लिए ‘गर्म पैर स्नान’ लिया जाये तो अच्छा है, इसके लिए गर्म पानी में पैर डालकर बैठें | इससे रक्तसंचार सुचारू होगा | ध्यान रखें – गर्म पैर स्नान के समय माथे पर ताज़े पानी में भिगोकर एक तौलिया अवश्य रखें एवं बीच-बीच में पैर वाले पानी में गर्म पानी मिलाते रहें ताकि वह ठंडा न हो | इसके तुरंत बाद पूर्ण स्नान कर लें |
  • शरीर के विभिन्न अंगों में ऊष्मा एवं पोषक तत्व पहुँचाने में आयरन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | आयरन की कमी के कारण शरीर में कंपकंपी हो सकती है | इसकी पूर्ति के लिए भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों को अवश्य शामिल करें | शरीर में आयरन का संतुलन थयरायड ग्रंथि के स्राव को भी संतुलित करता है |
  • विटामिन बी-12 की कमी के कारण शरीर में आक्सीजन की आपूर्ति सुचारू ढंग से नहीं हो पाती, जबकि यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए आवश्यक है | दूध और दुग्ध-उत्पादों यथा दही, पनीर, खोया, मट्ठा आदि में  बी12 की पर्याप्त मात्रा प्राप्त होती है। पत्तेदार सब्जियां सोयाबीन, मूंगफली, दालें और अंकुरित अन्न भी उपयुक्त हैं।
  • नियमित रूप से योग करें | यदि सूर्य नमस्कार कर सकते हैं तो यह अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त होगा |
  • गहरी श्वास की क्रियाएं शरीर में अधिक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं, इसलिए इन्हें अवश्य करें |
  • बहुत सारे एवं तंग कपड़ें न पहनें, यह ऊपरी तौर पर भले ही सर्द हवाओं को रोकने में कारगर हों परन्तु आंतरिक रूप से रक्त संचार को बाधित करते हैं | अतः यथासंभव इससे बचें |

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