गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश की झांकी को दिया गया मस्जिद का रूप, आखिर कब तक होगा तुष्टिकरण ?

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गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ पर सभी राज्यों द्वारा झांकी निकालकर अपनी संस्कृति का नमूना पेश करना एक परम्परा रही है । जिसमे सभी राज्य अपनी सभ्यता संकृति की एक झलक प्रस्तुत करते हैंएस समारोह में जहाँ सभी राज्यों ने अपनी प्राचीन संस्कृति का परिचय दिया तो उत्तर प्रदेश की सपा सरकार यहाँ भी तुस्टीकरण की राजनीती करती नजर आई। जिस उत्तर प्रदेश में भगवान राम से लेकर भगवान कृष्ण ने जन्म लिया हो भारत में बहुसंख्यक हिन्दुओं के पवित्र तीर्थ स्थल काशी, मथुरा और अयोध्या हों उस उत्तर प्रदेश की झांकी में सिर्फ जालीदार टोपी पहने बुनकरों को ही काम करते दिखाया जाना मुस्लिम तुष्टिकरण के सिवा और क्या हो सकता हैं ! क्या इसके सिवा उत्तर प्रदेश की सभ्यता संस्कृति कुछ और है ही नहीं| मुस्लिम तुष्टिकरण और उनके वोट बैंक के चक्कर में ये समाजवादी आखिर प्रदेश की पहचान मिटने पर क्यों तुली हुई है!
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उत्तर प्रदेश की झांकी को एक मस्जिद का रूप दे दिया गया और झांकी में केवल टोपी वालों को दिखाया गया। पूजा पाठ एवं मंदिर का नमो निशान नहीं दिखा। झांकी देखकर ऐसा लगा कि उत्तर प्रदेश अपनी प्राचीनतम संस्कृति भुला चुका है और केवल तुस्टीकरण की संस्कृति पर यकीन करता है।
जहाँ एक और अन्य सभी राज्यों ने अपनी सभ्यता, संस्कृति, व्यवसाय, कृषि उत्पादन आदि को अपनी झांकी में शामिल कर अपने प्रदेश की पहचान को बखूबी प्रदर्शित किया तो वहीँ भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश की झांकी देखकर कभी भी ऐसा नहीं लगा कि ये उस उत्तर प्रदेश की झांकी है जिसमें अनेक साधू संतों और स्वयं ईश्वर ने कई कई बार अवतार लिया हो |

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