जानिए सांप के काटने पर क्या करें प्राथमिक उपचार !

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बरसात के मौसम में सांप के बिल में पानी भर जाने से अधिकतर सांप बाहर आ जाते हैं | ऐसे में इनके काटने का खतरा भी बढ़ जाता है | हालांकि सभी सांप जहरीले नही होते कुछ बिना जहर वाले भी होते हैं। ऐसा माना जाता है कि सांप का काटा व्यक्ति मरता नहीं है बल्कि बेहोशी की गहरी दशा में उसकी सभी इन्द्रियां शिथिल हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है। सांप के काटते ही यदि प्राथमिक चिकित्सा एवं समय पर चिकित्सा उपलब्ध हो जाये तो व्यक्ति के बचने की काफी सम्भावना रहती है। कई बार अँधेरे में सांप के काटने पर यह पता नही लग पाता कि काटने वाला जन्तु कौन था | ऐसी स्थिति में यदि सांप ने काटा है तो निम्न लक्षणों से पता लगाया जा सकता है –

काटे हुए स्थान पर तेज दर्द एवं सूजन
काटे हुए स्थान के आस-पास की त्वचा बैंगनी रंग की हो जाना |
काटे हुए स्थान पर छोटे-छोटे छिद्र दिखाई देना |
घबराहट,बेहोशी या नींद आना |
शरीर में सुन्नपन महसूस होना |
मुंह से लार टपकना |
आँखों की पुतलियाँ सिकुड़ जाना |
साँस लेने में तकलीफ होना |
शरीर में ऐंठन होना |
पीड़ित व्यक्ति को नीम की पत्तियां खिलाने पर पत्तियों का स्वाद मीठा लगना |

प्राथमिक चिकित्सा :

जैसे ही पता चले कि सांप ने काटा है, तुरंत डॉक्टर को बुलाना चाहिए या पीड़ित को हास्पिटल ले जाना चाहिए | जब तक डॉक्टर के पास पहुंचे उसके पहले ही जिस अंग पर सांप ने काटा हो उस अंग को इस प्रकार से बांध देना चाहिए कि रक्त का संचार ह्रदय की ओर जल्दी न पहुंचे एवं काटे हुए स्थान को ब्लेड या तेज धार वाले चाकू से चीरा लगाकर थोड़ा रक्त बाहर निकालकर पौटैशियम परमैंगनेट से धोकर घाव में पौटैशियम परमैंगनेट को भर देना चाहिए |
पीड़ित को गर्म पेय पिलाते रहना चाहिए |
सांस लेने में तकलीफ होने पर पीड़ित को कृतिम सांस देना चाहिए |
पीड़ित को नींद या बेहोशी न आये इस बात का ध्यान रखना चाहिए, इसके लिए उसके मुंह पर ठण्डे पानी के छींटे मारते रहना चाहिए।
जहर का असर कम करने के लिए यदि संभव हो सके तो चौलाई की जड़ को चावल के पानी में पीसकर ठन्डे पानी के साथ पिलाना चाहिए |
स्वमूत्र पिलाने से भी जहर का असर काफी हद तक समाप्त हो जाता है |

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