रुद्रावर्त: एक ऐसा तीर्थ जहाँ अद्रश्य शिवलिंग स्वीकारता है प्रत्यक्ष प्रसाद !

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वैसे भारत के कोने कोने में एक से एक अदभुद और विचित्र मंदिर आपको मिल जायेंगे | लेकिन हम आपको आज एक ऐसे तीर्थ के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद आपने आज तक नहीं सुना होगा एक ऐसा स्थान जहाँ गुप्त शिवलिंग पर बेलपत्र या फल चढ़ाने से वो उन्हें प्रत्यक्ष रूप में स्वीकार करते हैं | आपको ये सुनकर भले ही थिदा अटपटा लग रहा हो लेकिन ये सत्य है नैमिषारण्य कसबे से लगभग ७ किमी की दूरी गोमती नदी के तट प्राकृतिक जलकुंड में मौजूद महादेव के अद्रश्य शिवलिंग रुद्रावर्त पर बेलपत्र, फल सच्चे मन से अर्पित वो जल में डूब जाते हैं जबकि सामान्यतौर पर ये चीजे जल में डूबती नहीं हैं |रुद्रावर्त में बेलपत्र ही नहीं गाय के दूध को इस कुण्ड के जल में अंदर तक एक ही धार के साथ जाते हुए भी देखा जाता है। रुद्रावर्त में हैरान कर देने वाली तस्वीरें तब दिखाई देती है जब भगवान शिव को अर्पित किये गए फलों को जल में डालने पर कुछ चंद छड़ों में प्रसाद के रूप में उनमें से एक या दो फल वापस जल में ऊपर आकर तैरने लगते हैं, जिसको श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।


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हालाँकि शिवलिंग के दर्शन प्रत्यक्ष रूप में नहीं होते हैं लेकिन शिवलिंग का अरघा आसानी से दिख जाती है इस तीर्थ स्थान पर वर्षों से सेवा कर रहे बाबा की मानें तो किसी को ये ज्ञात नहीं की इस कुण्ड में शिवलिंग कितना अंदर है और न ही किसी ने देखा है। एक और विचित्र बात है उस अरघे से जल सदैव निकलता रहता है | वहां मौजूद पुजारी की माने तो उक्त स्थान पर उस अरघे में शिवलिंग मौजूद हैं | वैसे से इस स्थान पर कोई भव्य निर्माण या मंदिर नहीं है लेकिन कुंड के किनारे ही डॉ छोटे छोटे मंदिर बने हैं एक में शिवलिंग स्थापित है तो दूसरे नाग नागिन की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं | वहां मौजूद ग्रामीणों की माने तो यहाँ पर नाग नागिन प्रत्यक्ष रूप में मौजूद है कुछ समय यहाँ व्यतीत कर जिनका दर्शन आसानी से किया जा सकता है |

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